यह कि बीमा क्लेम का नामंजूर (Reject) होना एक बड़ा झटका है। आपने प्रीमियम भरा, लेकिन जब ज़रूरत पड़ी तो कंपनी ने इनकार कर दिया। यह कि लेकिन यह मानकर न बैठें कि अब कुछ नहीं हो सकता — कानून में कई उपाय हैं।
क्लेम रिजेक्ट होने के सामान्य कारण
यह कि बीमा कंपनियाँ अक्सर इन कारणों से क्लेम रिजेक्ट करती हैं:
- पहले से मौजूद बीमारी (Pre-existing condition) का खुलासा न करना
- पॉलिसी में छूट वाला कारण (Exclusion Clause)
- दस्तावेज़ों में कमी
- समय पर सूचना न देना
- अस्पताल नेटवर्क से बाहर इलाज
क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या करें
पहला कदम — कंपनी को लिखित अपील
यह कि रिजेक्शन लेटर मिलने के बाद बीमा कंपनी के Grievance Redressal Officer को लिखित शिकायत भेजें। रिजेक्शन के कारणों का जवाब दें और अपने दावे के सबूत दोबारा भेजें।
दूसरा कदम — बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman)
यह कि अगर कंपनी 30 दिन में जवाब न दे या जवाब संतोषजनक न हो, तो बीमा लोकपाल के पास शिकायत करें। जयपुर में बीमा लोकपाल कार्यालय है। यहाँ शिकायत मुफ़्त में और जल्दी होती है।
तीसरा कदम — उपभोक्ता फोरम या अदालत
यह कि अगर बीमा लोकपाल से भी राहत न मिले — उपभोक्ता फोरम (DCDRC, जयपुर) में शिकायत दर्ज की जा सकती है। यहाँ "सेवा में कमी" के आधार पर मुआवज़ा और क्लेम राशि दोनों माँगे जा सकते हैं।
यह कि IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) के Bima Bharosa पोर्टल (bimabharosa.irda.gov.in) पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। IRDAI बीमा कंपनियों का नियामक है और कंपनी पर कार्रवाई कर सकती है।
महत्वपूर्ण बातें
रिजेक्शन लेटर, पॉलिसी दस्तावेज़, सभी मेडिकल रिकॉर्ड और पत्राचार संभालकर रखें।
बीमा लोकपाल में शिकायत के लिए ₹20 लाख तक के क्लेम आते हैं — मुफ़्त और 3 महीने में निपटारा।
उपभोक्ता फोरम में क्लेम राशि के अलावा मानसिक परेशानी का मुआवज़ा भी माँगा जा सकता है।
पॉलिसी खरीदते समय सभी पुरानी बीमारियाँ सच-सच बताएं — छुपाने से क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा बढ़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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