पति से अलगाव या तलाक की स्थिति में सबसे बड़ी चिंता यही होती है — गुज़ारा कैसे चलेगा? भारतीय कानून पत्नी, नाबालिग बच्चों और कुछ परिस्थितियों में माता-पिता को भी भरण-पोषण (maintenance) पाने का स्पष्ट अधिकार देता है — और इसके लिए एक से अधिक कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं।

भरण-पोषण किन कानूनों के तहत मांगा जा सकता है

एक से अधिक कानूनों के तहत आवेदन संभव है

यह ज़रूरी नहीं कि आप केवल एक ही कानून के तहत आवेदन करें। धारा 144 BNSS के तहत आवेदन के साथ-साथ, यदि तलाक का मुकदमा भी चल रहा है, तो उसमें अंतरिम भरण-पोषण की अलग याचिका भी दी जा सकती है। कोर्ट यह सुनिश्चित करती है कि एक ही अवधि के लिए दोहरा भुगतान न हो।

भरण-पोषण की राशि कैसे तय होती है

कोई निश्चित फॉर्मूला नहीं है, लेकिन कोर्ट सामान्यतः इन बातों को ध्यान में रखती है:

आवेदन करने की प्रक्रिया

धारा 144 BNSS के तहत आवेदन संबंधित मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर किया जाता है, जहां पति-पत्नी में से कोई भी रहता है। आवेदन के साथ आय-व्यय का विवरण, पति की आय के अनुमानित प्रमाण (यदि उपलब्ध हों), और विवाह/संतान से जुड़े दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होते हैं। कोर्ट अंतिम निर्णय से पहले भी अंतरिम भरण-पोषण का आदेश दे सकती है ताकि मुकदमे के दौरान गुज़ारा न रुके।

याद रखने योग्य मुख्य बातें

भरण-पोषण का अधिकार तलाक होने या न होने पर निर्भर नहीं करता — अलग रह रही पत्नी भी इसकी हकदार हो सकती है।

अंतरिम भरण-पोषण की मांग ज़रूर करें — मुख्य मुकदमे में सालों लग सकते हैं, अंतरिम आदेश तुरंत राहत देता है।

पति की आय-संपत्ति का प्रमाण जुटाना केस को मज़बूत बनाता है — बैंक स्टेटमेंट, संपत्ति के दस्तावेज़, सैलरी स्लिप आदि।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इस विषय से जुड़े वो सवाल जो लोग सबसे ज़्यादा पूछते हैं

भरण-पोषण के लिए कौनसा कानून सबसे तेज़ और सरल माना जाता है? +
धारा 144 BNSS (पूर्व में सीआरपीसी की धारा 125) सबसे सरल और तेज़ प्रक्रिया मानी जाती है, क्योंकि यह किसी भी धर्म की महिला पर लागू होती है और मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर की जा सकती है, जिससे प्रक्रिया अपेक्षाकृत कम समय लेती है।
क्या तलाक की कार्यवाही पूरी होने से पहले भरण-पोषण मिल सकता है? +
हां। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत तलाक के मुकदमे के दौरान अंतरिम भरण-पोषण की मांग की जा सकती है, और धारा 144 BNSS के तहत भी कोर्ट अंतिम आदेश से पहले अंतरिम भरण-पोषण दे सकती है।
भरण-पोषण की राशि तय करने के लिए कोर्ट किन बातों को देखती है? +
कोर्ट पति की आय और कमाने की क्षमता, पत्नी-बच्चों की उचित आवश्यकताएं, विवाह के दौरान का जीवनस्तर, और पत्नी की अपनी आय व आत्मनिर्भरता जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर राशि तय करती है — कोई निश्चित फॉर्मूला नहीं है।
क्या पत्नी एक से अधिक कानूनों के तहत भरण-पोषण के लिए आवेदन कर सकती है? +
हां, आवेदन एक से अधिक कानूनों के तहत किया जा सकता है — जैसे धारा 144 BNSS और हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 दोनों के तहत — लेकिन कोर्ट यह सुनिश्चित करती है कि एक ही अवधि के लिए दोहरा भुगतान न हो।