पति से अलगाव या तलाक की स्थिति में सबसे बड़ी चिंता यही होती है — गुज़ारा कैसे चलेगा? भारतीय कानून पत्नी, नाबालिग बच्चों और कुछ परिस्थितियों में माता-पिता को भी भरण-पोषण (maintenance) पाने का स्पष्ट अधिकार देता है — और इसके लिए एक से अधिक कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं।
भरण-पोषण किन कानूनों के तहत मांगा जा सकता है
- धारा 144, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) — पूर्व में सीआरपीसी की धारा 125 — पत्नी, नाबालिग बच्चे और असहाय माता-पिता के लिए तेज़ और सरल प्रक्रिया।
- हिंदू विवाह अधिनियम, धारा 24 व 25 — तलाक की कार्यवाही के दौरान अंतरिम भरण-पोषण (Section 24) और स्थायी गुज़ारा भत्ता (Section 25)।
- घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 — घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला आवास और भरण-पोषण दोनों की मांग एक साथ कर सकती है।
- हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 — विशेष रूप से हिंदू विवाहित महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार से जुड़ा प्रावधान।
यह ज़रूरी नहीं कि आप केवल एक ही कानून के तहत आवेदन करें। धारा 144 BNSS के तहत आवेदन के साथ-साथ, यदि तलाक का मुकदमा भी चल रहा है, तो उसमें अंतरिम भरण-पोषण की अलग याचिका भी दी जा सकती है। कोर्ट यह सुनिश्चित करती है कि एक ही अवधि के लिए दोहरा भुगतान न हो।
भरण-पोषण की राशि कैसे तय होती है
कोई निश्चित फॉर्मूला नहीं है, लेकिन कोर्ट सामान्यतः इन बातों को ध्यान में रखती है:
- पति की आय और कमाने की क्षमता
- पत्नी और बच्चों की उचित आवश्यकताएं और जीवनस्तर (जिस स्तर पर वे विवाह के दौरान रह रहे थे)
- पत्नी की अपनी आय (यदि कोई हो) और आत्मनिर्भरता की स्थिति
- बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा खर्च
आवेदन करने की प्रक्रिया
धारा 144 BNSS के तहत आवेदन संबंधित मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर किया जाता है, जहां पति-पत्नी में से कोई भी रहता है। आवेदन के साथ आय-व्यय का विवरण, पति की आय के अनुमानित प्रमाण (यदि उपलब्ध हों), और विवाह/संतान से जुड़े दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होते हैं। कोर्ट अंतिम निर्णय से पहले भी अंतरिम भरण-पोषण का आदेश दे सकती है ताकि मुकदमे के दौरान गुज़ारा न रुके।
याद रखने योग्य मुख्य बातें
भरण-पोषण का अधिकार तलाक होने या न होने पर निर्भर नहीं करता — अलग रह रही पत्नी भी इसकी हकदार हो सकती है।
अंतरिम भरण-पोषण की मांग ज़रूर करें — मुख्य मुकदमे में सालों लग सकते हैं, अंतरिम आदेश तुरंत राहत देता है।
पति की आय-संपत्ति का प्रमाण जुटाना केस को मज़बूत बनाता है — बैंक स्टेटमेंट, संपत्ति के दस्तावेज़, सैलरी स्लिप आदि।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस विषय से जुड़े वो सवाल जो लोग सबसे ज़्यादा पूछते हैं