यह कि घरेलू हिंसा — शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक या आर्थिक — एक गंभीर अपराध है। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 महिलाओं को शीघ्र और प्रभावी कानूनी सुरक्षा देता है।
इस अधिनियम के तहत क्या-क्या माँग सकती हैं
यह कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के अंतर्गत पीड़ित महिला निम्नलिखित आदेश माँग सकती है:
- संरक्षण आदेश (Protection Order): हिंसा करने वाले को आपसे दूर रहने का आदेश
- आवास आदेश (Residence Order): पति के घर में रहने का अधिकार
- भरण-पोषण आदेश (Maintenance Order): खर्च के लिए पैसे
- मुआवज़ा आदेश (Compensation Order): हिंसा की भरपाई के लिए
- हिरासत आदेश (Custody Order): बच्चों की कस्टडी
शिकायत कहाँ करें
यह कि शिकायत के लिए तीन रास्ते हैं:
- संरक्षण अधिकारी (Protection Officer): हर ज़िले में नियुक्त होते हैं। जयपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग में मिलते हैं।
- पुलिस: नज़दीकी थाने में या महिला थाने में शिकायत
- मजिस्ट्रेट की अदालत: सीधे मजिस्ट्रेट के सामने याचिका
यह कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत संरक्षण आदेश के लिए FIR दर्ज करना ज़रूरी नहीं है। सीधे मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन दिया जा सकता है। अदालत 24 घंटे में अंतरिम संरक्षण आदेश दे सकती है।
महत्वपूर्ण बातें
राजस्थान में Rajasthan State Legal Services Authority (RSLSA) घरेलू हिंसा पीड़ितों को मुफ़्त कानूनी सहायता देती है।
181 (महिला हेल्पलाइन) पर कॉल करें — 24x7 उपलब्ध, तुरंत मदद मिलती है।
घरेलू हिंसा के सबूत — फोटो, मेडिकल रिपोर्ट, गवाह — संभालकर रखें।
IPC/BNS की धारा 498A (पति और ससुराल वालों द्वारा क्रूरता) के तहत भी आपराधिक शिकायत की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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