यह कि यौन उत्पीड़न — चाहे कार्यस्थल पर हो, सार्वजनिक जगह पर हो, या किसी बच्चे के साथ — एक गंभीर अपराध है। भारत में इसके विरुद्ध कड़े कानून हैं। यह कि पीड़िता को शर्म या डर की वजह से चुप नहीं रहना चाहिए — कानून पूरी तरह उनके साथ है।

POCSO अधिनियम — बच्चों की सुरक्षा

यह कि POCSO (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से सुरक्षा देता है। इस अधिनियम की विशेषताएं:

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न — POSH अधिनियम

यह कि कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के तहत:

FIR दर्ज करवाने का अधिकार

यह कि यौन उत्पीड़न और बलात्कार के मामलों में पुलिस को FIR दर्ज करना अनिवार्य है। अगर पुलिस FIR दर्ज न करे — मजिस्ट्रेट के सामने सीधे शिकायत की जा सकती है।

निर्भया फंड से सहायता

यह कि बलात्कार पीड़िता को राजस्थान सरकार की "मुख्यमंत्री सहायता कोष" और केंद्र सरकार के "निर्भया फंड" से आर्थिक सहायता मिल सकती है। साथ ही मुफ़्त कानूनी सहायता और चिकित्सा सहायता का अधिकार भी है।

महत्वपूर्ण बातें

पुलिस को POCSO की FIR दर्ज करने से इनकार नहीं करने का अधिकार है — धारा 19 के तहत कोई भी व्यक्ति POCSO की रिपोर्ट कर सकता है।

112 (पुलिस हेल्पलाइन) और 181 (महिला हेल्पलाइन) पर तुरंत कॉल करें।

POSH शिकायत के लिए 3 महीने की सीमा है — इस अवधि में IC के पास लिखित शिकायत दें।

पीड़ित की पहचान मीडिया में प्रकट करना कानूनी अपराध है — अगर ऐसा हो तो शिकायत करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लोग इस विषय पर ये सवाल सबसे ज़्यादा खोजते हैं

यौन उत्पीड़न की शिकायत कहाँ करें? +
कार्यस्थल पर हुए उत्पीड़न के लिए Internal Committee (IC) में या ज़िला स्तरीय Local Committee (LC) में। सार्वजनिक स्थान या घर पर हुए उत्पीड़न के लिए नज़दीकी पुलिस थाने में या मजिस्ट्रेट के सामने FIR दर्ज करवाएं।
POCSO Act क्या है? +
POCSO (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार को रोकने का कानून है। इसमें विशेष कोर्ट, गुप्त पहचान, एकल बयान और कड़ी सज़ा का प्रावधान है। POCSO की रिपोर्ट करने की ज़िम्मेदारी किसी पर भी हो सकती है जिसे ऐसे अपराध की जानकारी हो।
POSH Act के तहत Internal Committee में कैसे शिकायत करें? +
IC में लिखित शिकायत दें — घटना के 3 महीने के भीतर। शिकायत में तारीख, घटना का विवरण और गवाहों के नाम लिखें। IC 90 दिन में जांच पूरी करती है और कंपनी को रिपोर्ट देती है।
अगर IC ने शिकायत न सुनी तो क्या करें? +
ज़िला स्तरीय Local Committee (LC) में शिकायत करें — IC के खिलाफ या जहाँ IC नहीं है वहाँ। LC ज़िला कलेक्टर के अधीन काम करती है। इसके अलावा उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की जा सकती है।