आर्थिक तंगी के कारण अगर लोन की किस्तें (EMI) चुकाना मुश्किल हो गया है, तो घबराने के बजाय यह जानना ज़रूरी है कि बैंक तुरंत आपकी संपत्ति नहीं छीन सकता — इसके लिए एक तय कानूनी प्रक्रिया है, और उधारकर्ता के पास हर चरण पर अपनी बात रखने और चुनौती देने के अधिकार हैं।
SARFAESI एक्ट क्या है
वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (SARFAESI Act) बैंकों और वित्तीय संस्थानों को बिना कोर्ट गए, गिरवी रखी गई (secured) संपत्ति को कब्ज़े में लेकर बेचने का अधिकार देता है — लेकिन इसके लिए भी एक तय प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
चरण-दर-चरण प्रक्रिया
- खाता NPA घोषित होना: लगातार 90 दिनों तक किस्त न चुकाने पर खाता "गैर-निष्पादित आस्ति" (Non-Performing Asset/NPA) घोषित होता है।
- धारा 13(2) नोटिस: बैंक को 60 दिनों का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है, जिसमें बकाया राशि का पूरा भुगतान करने का अवसर दिया जाता है।
- आपत्ति दर्ज करने का अधिकार: इस 60 दिन की अवधि में उधारकर्ता धारा 13(3A) के तहत बैंक को लिखित आपत्ति/प्रतिवेदन दे सकता है, जिसका बैंक को कारण सहित जवाब देना अनिवार्य है।
- धारा 13(4) कार्रवाई: यदि 60 दिनों में भुगतान नहीं होता, तो बैंक संपत्ति पर कब्ज़ा ले सकता है, प्रबंधन अपने हाथ में ले सकता है, या संपत्ति बेचने की कार्रवाई शुरू कर सकता है।
यदि बैंक ने धारा 13(4) के तहत कार्रवाई शुरू भी कर दी है, तो उधारकर्ता (या कोई भी प्रभावित पक्ष) ऋण वसूली अधिकरण (Debt Recovery Tribunal/DRT) के समक्ष धारा 17 SARFAESI के तहत आवेदन दायर कर सकता है, जिसमें बैंक की कार्रवाई को चुनौती दी जा सकती है — जैसे नोटिस की अनियमितता, राशि की गलत गणना, या प्रक्रिया का पालन न होना।
नीलामी प्रक्रिया में उधारकर्ता के अधिकार
- संपत्ति की नीलामी से पहले उचित सार्वजनिक नोटिस (30 दिन पूर्व) दिया जाना अनिवार्य है
- संपत्ति का उचित और सही मूल्यांकन (valuation) कराया जाना चाहिए — कम मूल्य पर नीलामी को चुनौती दी जा सकती है
- नीलामी की तारीख से पहले तक बकाया राशि चुकाकर संपत्ति बचाने (redemption) का अधिकार बना रहता है
DRT के पास कब जाना चाहिए
यदि आपको लगता है कि बैंक ने प्रक्रिया का सही पालन नहीं किया — जैसे नोटिस सही तरीके से नहीं भेजा गया, आपत्ति का जवाब नहीं दिया गया, या राशि की गणना गलत है — तो DRT में समय रहते चुनौती देना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि एक बार संपत्ति बिक जाने के बाद विकल्प सीमित हो जाते हैं।
याद रखने योग्य मुख्य बातें
बैंक सीधे संपत्ति नहीं छीन सकता — NPA घोषणा से लेकर नीलामी तक तय प्रक्रिया और समय-सीमाएं हैं।
धारा 13(2) नोटिस मिलते ही आपत्ति दर्ज करें — चुप रहना आपके अधिकार को कमज़ोर करता है।
नीलामी से पहले तक बकाया चुकाकर संपत्ति बचाने का अधिकार रहता है — इसे नज़रअंदाज़ न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस विषय से जुड़े वो सवाल जो लोग सबसे ज़्यादा पूछते हैं